महाविद्यालय परिचय


वाराणसी से 75 किलोमीटर पूरब, राष्ट्रीय राजमार्ग-29 पर आवास्थित अपने ऐतिहासिक एवं प्राचीन गौरव के लिए प्रसिद्ध गाजीपुर नगर में स्नातकोत्तर महाविद्यालय की स्थापना जुलाई 1957 में हुई | यह महाविद्यालय गाजीपुर सिटी रेलवे स्टेशन से तीन किलोमीटर दक्षिण रविन्द्रपुरी ( गोरा बाज़ार ) में स्तिथ है | यह स्नातकोत्तर महाविद्यालय, वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविधालय, जौनपुर से सम्बद्ध है | यहाँ इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविधालय नई दिल्ली व उ.प्र.राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविधालय इलाहबाद के अध्यनन-केंद्र भी है | समस्त शैक्षणिक कार्य इन विश्वविधालय के आध्यादेश, नियम-उपनियम एवं अधिनियम तथा पाठ्यक्रम के अन्तर्गत संचालित एवं संपन्न होते है | महाविद्यालय में कुल पांच संकाय हैं |


उ.प्र. सरकार ने उच्च शिक्षा में सुधार करने की निति बनाते हुए यह निर्णय लिया है कि 10 वित्तपोषित तथा 10 राजकीय महाविद्यालय को आदर्श महाविद्यालय के रूप में विकसित किया जाय | हमारे लिए यह गौरव की बात है की हमारे महाविद्यालय को भी उ.प्र. सरकार द्वरा इसी सूचि में प्रमुखता से स्थान देते हुए चिन्हित किया गया है | संस्था के उचक शैक्षिक स्तर एवं परिसर में उबलब्ध सुबिधाओ के सत्यापन के लिए यु.जी.सी. के तत्वाधान में गठित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद्, बंगलुरु द्वारा नामित पियर टीम ने दिनांक 26, 27 एवं 28 फ़रवरी 2006 को महाविद्यालय का पूर्णरुपेण निरिक्षण किया और महाविद्यालय को B++ ग्रेड से अलंकृत किया | पियर टीम की रिपोर्ट और टीम के सदस्यों के सुझावो के अनुरूप महाविद्यालय के क्रियाकलापो में अपेक्षित सुधार के प्रयाश किये जा रहे हैं | इसी क्रम में कुछ नई समितियों का गठन किया गया है | महाविद्यालय परिक्षेत्र वाई-फाई की सुविधा से युक्त है | प्राय: सभी विभागों में कंप्यूटर सुबिधा उपलब्ध है



महाविधालय की स्थापना एवं उसके विकस के पीछे एक महान प्रेरक शक्ति महाविद्यालय के संसथान सचिव / प्रबंधक श्री राजेश्वर प्रसाद सिंह जी है जो अपनी अटूट जिजीविषा के साथ आज भी महाविद्यालय के उन्नयन में संम्बध हैं | बदलते वक़्त के साथ कदम से कदम मिलाते हुए महाविद्यालय प्रबन्धन ने महाविद्यालय की बागडोर बहुआयामी व्यक्तित्व के धनि एवं उच्च न्यायालय के एड्वोकेट श्री अजित कुमार सिंह के हाथो में प्रबंधन का दायित्व सौपा है | उनके प्रयास से महाविद्यालय द्रुत गति से प्रगति के पथ पर अग्रसर है |


प्राचार्य की कलम से...










डॉ. अशोक कुमार सिंह ( प्राचार्य )

स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर : अवदान एवं उपलब्धियां
यह लिखते हुए मुझे बेहद खुसी है कि आप स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गाजीपुर में प्रवेश चाहते हैं | सन 1995 में स्थापित यह महाविद्यालय पूर्वांचल के महत्वपूर्ण महाविद्यालयों में गिना जाता है | यहाँ कला, विज्ञान, कृषि-विज्ञान, शिक्षा और खेल-कूद के संकाय हैं | इस महाविद्यालय में आपको अच्छे शिक्षक मिलेंगे और और स्वस्थ वातावरण भी | रोवर्स-रेंजर्स एन.एस.एस., एन.सी.सी. और खेल-कूद में हो तो इनके लिए भी आपको सुविधाएं उपलब्ध होगी और उनको अपने भविष्य को संवारने का अवसर मिलेगा | हमारे महाविद्यालय के छात्र संबद्ध महाविद्यालयों एवं राष्ट्रीय स्तर पर होने वाली प्रतियोगिताओं में कीर्तिमान स्थापित कर सम्मानित हुए हैं |

महाविद्यालय विकास के पथ पर अग्रसर है ऑ यह प्रसन्नता की बात है कि यहां अनुवांशिकी एवं उद्यान-विज्ञान जैसे विषयों पर भी स्नात्कोत्तर स्तर पर पठन-पाठन की व्यवस्था है | फिजिकल एजुकेशन, हेल्थ एजुकेशन और सपोर्टस त्रिवर्षीय कोर्से को बी.पी.आई. के चतुर्थवर्षीय प्रोफेशनल कोर्स में बदलने की प्रक्रिया चलाई जा रही है | कृषि-विज्ञान केंद्र भी जनपद के किसानो और कृषि संकाय के छात्रों को लाभ पंहुचा रहा है यह कैम्पस रेडियो स्टेशन स्थापित है जो आपको तथा जनपद के किसानों को प्रशिक्षित करता है | यहां औषधीय एवं सुगंधयुक्त पौधों का एक उद्यान भी है | संस्था के उच्च शैक्षिक स्तर एवं परिसर में उपलब्ध सुविधाओं के सत्यापन के लिए गठित राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद, बेंगलुरु द्वारा नामित टीम ने महाविद्यालय का निरीक्षण किया और इसे बी (2015) ग्रेड से अलंकृत किया |

महाविद्यालय के शिक्षकों की यहाँ एक अच्छी अकादमिक परंपरा भी है | हमारे महाविद्यालय में डॉ. विवेकी राय, डॉ. जितेंद्र नाथ पाठक, पं0 काशीनाथ द्विवेदी, डॉ. शिव मुरत सिंह, डॉ. पी.एन. सिंह और धर्मनारायण जैसे शिक्षक रहे हैं | जिनकी अपनी-अपनी विशिष्ट पहचान है | मेरी भी एक पुस्तक उत्तर-आधुनिक-विमर्श आज चर्चा में है | वनस्पति विज्ञान के डॉ. आर.के. गुप्त और रसायन विज्ञान के डॉ. हरे कृष्ण श्रीवास्तव भी अपने-अपने विषय में विशिस्ट अवदान के लिए जाने जाते हैं | इसी तरह यहां के कुछ छात्र जैसे आनंद कुमार भट्ट, डॉ. मंगला राय, जय सिंह, पंकज उपाध्याय, एस.एन. वर्मा, डॉ. ए. एन राय, एस. एन. पांडेय, ओम धीरज आदि ने प्रशासकीय एवं शैक्षिक सेवाओं में ख्याति अर्जित की है | यह भी गौरव की बात है कि यहां के अनेक छात्र एवं छात्राएं जैसे कैलाश यादव, वीरेन्द्र यादव, बाबूलाल बलवंत, अनिल कुमार दुबे, खुशीर्द अहमद, डॉ. संगीता बलवंत आदि भी राजनीतिक और प्रशासन में सफलता के साथ सक्रिय है |

महाविद्यालय की स्थापना के लिए तकनीकी जिलाधिकारी श्री कुशपाल सिंह जी ने पहल की और जिसमें गजानन्द जी, गुलामुद्दीन साहब, सरजू पाण्डेय, राजेश्वर प्रसाद सिंह, राजनाथ सिंह, लालाजी केसरी आदि की भूमिका महत्वपूर्ण रही है | श्री राजेश्वर प्रसाद सिंह ने सचिव /प्रबंधक की हैसियत से महाविद्यालय के विकास में अपुर्व योगदान दिया है | इसी क्रम में अब श्री अजीत कुमार सिंह महाविद्यालय महाविद्यालय के सचिव/प्रबंधक प्रबंधक के रूप में कॉलेज के विस्तार और संगठन में सक्रिय हैं | मुझे विश्वास है कि आप इस संस्था में प्रवेश लेकर अपना भविष्य बनाएंगे और संस्था के गौरव को बदल देंगे | मै इस महाविद्यालय में आपके आगमन का स्वागत करता हूं और मुझे विश्वास है कि आप अपने उज्जवल भविष्य के लिए यहां उपलब्ध संसाधनों का उचित प्रयोग करते हुए प्रगति के पथ पर अग्रसर रहेंगे |

शुभकामनाओं के साथ

डॉ. अशोक कुमार सिंह

(प्राचार्य )



Chairman's Message



Post-Graduate college has five decades of rich and spectacular history,one whose total contents defy description but from which,atleast major events can be highlighted.

In April 1956,we formed the Degree College Association-a philanthropic society for promotion,Integration,creation and dissemination of knowledge. It is an umbrella association, which has conceptualized and constituted from time to time, several academic, scientific and technical bodies, concordant with societal needs and global academic environment.

We have constantly moved up the growth ladder sans profit-motive. Our faith in spiritual rather than material values has kept us impermeable to contarminations introduced by market forces Ushering value-based education that promoted human excellence and enhances competitive abilities in today's academic world is Herculean task in itseft.

We nurtured a dream to become a leading technical institute with a global vision. Today, the dream has become a reality as PGC academicians and students alike have gained due recongnition for their academic and professional excellence. As Chairman of PGC Ghazipur.I welcome you to this fascinating Institution.Looking forward to your valuable association with us.







R.P Singh (Chairman )
P.G College Ghazipur



Vision-Mission & Objective


Vision-
To provide quality education for all and help develop equal and just society by generating creative impulse and cultural development with emphasis on science and technology to eradicate proverty and encourage modernization in this backward district of eastern part of Uttar Pradesh.


दृष्टि -
उत्तर प्रदेश के इस पिछड़े जनपद में सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, रचनात्मक प्रेरणा उत्पन्न कर तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को महत्व देकर विपन्नता का उन्मूलन करने हेतु सांस्कृतिक विकाश एवं आधुनिकता को प्रोत्साहित करना |


Mission-
•  To promote knowledge as power and arm people with informations skill, feeling and sentiments to contribute in National development.
•   To promote higher education to fulfill the social need and global requirements.
•  To encourage and adopt the holistic approach toward acquisition of knowledge in a knowledge-based society in this era of Science and technology .
•  To inculcate spiritual and moral values into the young Minds.
•  To impart quality education through useful course material, infrastructural development by incorporating feedback system.
•  To develop trained human resource through Value added knowledge management.


लक्ष्य -
• सामर्थ्य के रूप में ज्ञान का संवर्धन तथा लोगों को सूचना कौशल भाव एवं संदेश से संबंधित कर राष्ट्रीय विकास में योगदान करना |
•  सामाजिक आवश्यकता तथा वैदिक अपेक्षाओं के परीक्षण हेतु उच्च शिक्षा का संवर्धन करने |
•  आज की वैज्ञानिक एवं आधुनिक युग के तकनीकी युग विज्ञान आधारित सामाजिक विज्ञान ज्ञानार्जन हेतु प्रोत्साहित करने में नियमित समाजवादी पहुंच को अंगीकार करने के लिए प्रोत्साहित करना |
•  युवा मन में आध्यात्मिक तथा नैतिक मूल्यों का स्थापना स्थापित कर |
•  पुनर्निर्मित तंत्र स्थापित कर उपयोगी पाठ्य सामग्री एवं एवं संचार आत्म आत्म विकास के माध्यम से गुणों गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करें |
•  आधारित ज्ञान प्रबंध के माध्यम से प्रशिक्षित मानव संस्थान का विकास करना |


Objective-
•To disseminate quality higher education
• To promote vocational and technological skills
• To encourage use of Science and Technology in agriculture
• To prepare skilled human resource for modern industry
• To focus on modern technology in teaching
• To offer Physical Education for healthy mind and spirit
• To concentrate on women education
• To spread education through conventional and distance learning systems
• To import Environmental education and learning
• To emphasize learning of various Indian languages with added emphasis on English
• To include skill for small-scale industries


उद्देश्य -
• गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का प्रसार |
• व्यवसायिक एवं प्रौद्योगिकी कौशल का संवर्धन |
• कृषि क्षेत्र में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रोत्साहित करना |
• आधुनिक अध्यवसाय हेतु कुशल मानव-संसाधन तैयार करना |
• अध्यापन में आधुनिक तकनीकी पर ध्यान सकेन्द्रन |
• स्वस्थ मन एवं मस्तिष्क के लिए शारीरिक शिक्षा प्रदान करना |
• नारी शिक्षा की महत्ता स्थापित करना |
• पारंपरिक एवं दूरस्थ-शिक्षा व्यवस्थाओं के माध्यम से शिक्षा का प्रसार |
• पर्यावरण शिक्षा एवं अधिगम प्रदान करना |